महापौर, सभापति, एमआईसी सदस्य, पार्षद एवं निगम अधिकारियों को दी गई नियमों की विस्तृत जानकारी
रायगढ़ शासन के निर्देशानुसार नगर निगम द्वारा मंगलवार 19 मई 2026 को वार्ड निगम सभाकक्ष में स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में महापौर श्री जीवर्धन चौहान, सभापति श्री डिग्री लाल साहू, एमआईसी सदस्यगण, पार्षदगण सहित निगम के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला में प्रेजेंटेशन के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रावधानों, कचरा पृथक्करण की अनिवार्यता तथा स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों-कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई गई। कार्यशाला में बताया गया कि पहले मुख्य ध्यान केवल कचरा उठाकर शहर से बाहर ले जाने पर केंद्रित था, लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि यदि कचरा उसके उत्पन्न होने वाले स्थान पर अलग-अलग नहीं किया जाएगा तो उसका प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण प्रभावी रूप से संभव नहीं हो पाएगा।
मिश्रित कचरे से दुर्गंध, बीमारियां, नालियों के जाम होने, जलभराव, नदी-तालाबों के प्रदूषण और डंपिंग स्थलों पर दबाव बढ़ने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। नए नियमों का मुख्य उद्देश्य यही है कि कचरे का पृथक्करण उसी स्थान पर हो, जहां वह उत्पन्न होता है।
कचरा पृथक्करण क्यों जरूरी
कार्यशाला में जानकारी दी गई कि गीले कचरे से खाद अथवा बायोगैस बनाई जा सकती है, जबकि सूखे कचरे का पुनर्चक्रण किया जा सकता है। सैनिटरी अपशिष्ट एवं विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट को सामान्य कचरे में मिलाना स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है। यदि सभी प्रकार का कचरा एक साथ मिल जाएगा तो पूरी प्रसंस्करण व्यवस्था प्रभावित होगी। अलग-अलग किया गया कचरा ही स्वच्छता व्यवस्था को स्थायी और प्रभावी बनाता है।

जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में क्या कर सकते हैं
-नागरिकों को चार प्रकार के कचरे की जानकारी दें।
-वार्ड स्तर पर छोटी-छोटी बैठकें आयोजित करें।
-महिला समूह, युवा समूह, स्कूल, व्यापारी संघ एवं सामाजिक संगठनों को अभियान से जोड़ें।
-खुले में कचरा फेंकने वाले स्थानों की पहचान कर मिश्रित कचरा देने की आदत को धीरे-धीरे बंद कराएं।
-क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाएं।

नियमों के पालन से होंगे ये बड़े लाभ
-शहर और गांवों में साफ-सफाई की स्थिति बेहतर होगी।
-नालियों में कचरा जाने की समस्या कम होगी और जलभराव घटेगा।
-मच्छरों, दुर्गंध और बीमारियों का खतरा कम होगा।
-पुनर्चक्रण और कचरा प्रसंस्करण के माध्यम से संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
-नियमों का पालन नहीं होने पर डंपिंग स्थलों, पुराने कचरे, प्रदूषण सहित निकाय पर आर्थिक एवं कानूनी बोझ बढ़ेगा।

नागरिकों से अपेक्षित सहयोग
निगम प्रशासन ने नागरिकों से घरों एवं दुकानों में ही कचरे को अलग-अलग रखने की अपील की। साथ ही सड़क, नाली, खाली प्लॉट, तालाब, नदी अथवा सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फेंकने, कचरा नहीं जलाने तथा अधिकृत कचरा संग्रहण वाहन अथवा सफाई कर्मचारी को ही कचरा देने का आग्रह किया गया। इसके अलावा स्थानीय निकाय द्वारा निर्धारित सफाई शुल्क का नियमित भुगतान करने की भी अपील की गई, ताकि स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

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