सलखिया में 50 किसान जैविक तरीके से कर रहे रागी की खेती, ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर रागी पर फोकस
पोषण और आय बढ़ाने के लिए मोटे अनाज की खेती को किया जा रहा प्रोत्साहित
रायगढ़, 13 मार्च 2026// जिले में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लैलूंगा विकासखंड में डीएमएफ के सहयोग से रागी की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने विकासखंड लैलूंगा के सलखिया स्थित गुरुकुल आश्रम का भ्रमण कर वहां संचालित रागी की खेती का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों द्वारा अपनाई जा रही जैविक खेती की पद्धति और तकनीकी प्रबंधन की जानकारी ली।
लैलूंगा विकासखंड में डीएमएफ के सहयोग से लगभग 50 किसान इस वर्ष रागी की खेती कर रहे हैं। किसान पूरी तरह जैविक तरीके से खेती करते हुए आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं। किसानों को रागी उत्पादन की उन्नत तकनीकों की जानकारी देने के लिए छत्तीसगढ़ के रागी विशेषज्ञ श्री जैकब के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे खेती को अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनाया जा सके।
सलखिया क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर रागी की विशेष ऑर्गेनिक खेती कराई जा रही है। इस फसल की विशेषता यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद या कीटनाशक का उपयोग नहीं किया गया है और पूरी तरह जैविक पद्धति अपनाई गई है। किसानों को मास्टर ट्रेनर के माध्यम से तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि रागी की खेती को बेहतर तरीके से किया जा सके।
खरीफ सीजन में रागी का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य
निरीक्षण के दौरान बताया गया कि आने वाले समय में खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए रागी की खेती का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेष रूप से टिकरा भूमि में जहां किसान धान की खेती करते हैं, वहां उन्हें रागी की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। तैयार होने वाली रागी का उपयोग गुरुकुल आश्रम एवं वहां अध्ययनरत बच्चों के पोषण के लिए भी किया जाएगा। बता दे कि रागी को सुपर फूड माना जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। इस मॉडल को देखकर क्षेत्र के अन्य किसानों को भी मोटे अनाज की खेती के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिल सके।
