:1. **1947 से पहले ट्रांसफर की गई संपत्तियाँ**: वक्फ बोर्ड का इन संपत्तियों पर कोई अधिकार नहीं होगा, और उनके कागजात मान्य नहीं होंगे।

2. **1947 के बाद की संपत्तियाँ**: वक्फ बोर्ड को यह साबित करना होगा कि वे संपत्तियाँ कैसे उनके पास आईं। अगर वक्फ बोर्ड प्रमाणित कागजात प्रस्तुत नहीं कर पाता, तो संपत्ति मूल मालिक को लौटाई जाएगी।

3. **मूल मालिक की अनुपस्थिति**: यदि मूल मालिक बंटवारे के बाद देश छोड़ चुका है या शत्रु संपत्ति अधिनियम 2017 के तहत उसकी संपत्ति सरकार के अधीन आ गई है, तो वह संपत्ति सरकार की होगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर, यदि आपके आस-पास कोई ऐसी संपत्ति है जिसे आप मानते हैं कि वक्फ बोर्ड का अधिकार नहीं होना चाहिए, तो आप इस आदेश का हवाला देते हुए संबंधित सरकारी अथवा न्यायिक प्राधिकरण को सूचित कर सकते हैं। इस सूचना को साझा करना और अधिक लोगों को इसके बारे में जागरूक करना एक सकारात्मक कदम हो सकता है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस आदेश से लाभान्वित हो सकें।

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