रायगढ़ / औद्योगिक विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच आम जनता की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति गंभीर सवाल खड़े कर रही है। शहर में कहीं जर्जर पुल पर आए दिन जाम की स्थिति बन रही है, तो कहीं सड़कों से उड़ती धूल के कारण दोपहिया वाहन चालकों का चलना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की सक्रियता आखिर कहां दिखाई दे रही है?

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के प्रवक्ता एवं पूर्व पार्षद संजय देवांगन ने रायगढ़ की इन ज्वलंत समस्याओं पर शासन-प्रशासन से जवाब मांगते हुए कहा कि जनता की सुरक्षा को नजरअंदाज करके विकास का दावा नहीं किया जा सकता। जब आम नागरिक रोज इन परेशानियों से जूझ रहे हैं, तब संबंधित विभागों की चुप्पी और निष्क्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

जोगीडीपा पुल पर आए दिन जाम की स्थिति बनती है। पुल की जर्जर अवस्था को लेकर गंभीर चिंता है, इसके बावजूद सार्वजनिक परिवहन की बसें और कंपनियों की बसें इस मार्ग पर लगातार दौड़ रही हैं। ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यात्रियों और आम राहगीरों की सुरक्षा का है।

क्या संबंधित विभाग ने पुल की वर्तमान स्थिति का तकनीकी निरीक्षण कराया है? क्या पुल की भार वहन क्षमता का आकलन किया गया है? क्या भारी और यात्री वाहनों की आवाजाही के संबंध में कोई सुरक्षा समीक्षा हुई है? यदि पुल की स्थिति चिंताजनक है, तो आवश्यक मरम्मत, यातायात नियंत्रण और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?

जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग तथा संबंधित परिवहन और यातायात अधिकारियों को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

संजय देवांगन ने आगे कहा कि यदि किसी दिन पुल की खराब स्थिति या अव्यवस्थित यातायात के कारण कोई गंभीर दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना के बाद ही जागेगा?

जनता की सुरक्षा के लिए कार्रवाई दुर्घटना होने के बाद नहीं, उससे पहले होनी चाहिए

जोगीडीपा पुल और इस मार्ग का उपयोग सर्किट हाउस तक पहुंचने के लिए मंत्री, अधिकारी और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों द्वारा भी किया जाता है। ऐसे में यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि जब यह मार्ग प्रशासनिक और वीआईपी आवागमन के लिए भी उपयोग में आता है, तो इसकी स्थिति सुधारने के लिए प्रभावी पहल क्यों नहीं दिखाई देती?

क्या जिम्मेदार अधिकारियों को पुल पर लगने वाले जाम और इसकी जर्जर स्थिति की जानकारी नहीं है? क्या संबंधित विभागों ने मौके का निरीक्षण कर कोई रिपोर्ट तैयार की है? यदि रिपोर्ट तैयार हुई है, तो उस पर कार्रवाई कहां तक पहुंची?

संजय देवांगन ने कहा कि यह विडंबना है कि जिस मार्ग से जिम्मेदार लोग गुजरते हैं, उसी मार्ग पर आम जनता को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ती है।

क्या प्रशासन को इस पुल की बदहाली तभी दिखाई देगी, जब किसी वीआईपी का काफिला जाम में फंसेगा? आम नागरिकों की परेशानी क्या परेशानी नहीं है
संजय देवांगन ने आगे कहा कि
बाबा धाम पहुंच मार्ग पर धूल और डस्ट के कारण दोपहिया वाहन चालकों का चलना दुश्वार हो गया है। उड़ती धूल से वाहन चालकों की दृश्यता प्रभावित होने, दुर्घटना का खतरा बढ़ने और आसपास के लोगों की परेशानी हमेशा बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों के लिए यह केवल असुविधा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।

इस मार्ग का उपयोग औद्योगिक गतिविधियों और कंपनियों से संबंधित वाहनों द्वारा किया जाता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि सड़क की स्थिति सुधारने और धूल नियंत्रित करने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

क्या संबंधित कंपनियां अपने परिवहन मार्गों पर धूल नियंत्रण के लिए पर्याप्त उपाय कर रही हैं? क्या सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव, आवश्यक रखरखाव और धूल कम करने के दूसरे प्रभावी उपाय किए जा रहे हैं? क्या प्रशासन ने कंपनियों तथा संबंधित विभागों को इस समस्या के समाधान के लिए कोई निर्देश दिए हैं?

यदि कंपनियों के व्यावसायिक परिवहन से सड़क पर धूल और आवागमन संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, तो उनकी जिम्मेदारी की जांच होनी चाहिए और लागू नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

कंपनियां मुनाफा कमाएं, इसमें किसी को आपत्ति नहीं; लेकिन मुनाफे की कीमत आम नागरिक अपनी सुरक्षा, स्वास्थ्य और परेशानी से क्यों चुकाए?

  1. कंपनियों की जिम्मेदारी सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं हो सकती

रायगढ़ की औद्योगिक अर्थव्यवस्था में कंपनियों और ट्रांसपोर्टरों की अहम भूमिका है। लेकिन औद्योगिक गतिविधियों के साथ सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं।

यदि किसी कंपनी की बसें, सार्वजनिक परिवहन के वाहन या मालवाहक गाड़ियां किसी मार्ग का नियमित उपयोग करती हैं, तो सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों और लागू पर्यावरणीय मानकों के पालन की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। सड़क के रखरखाव या धूल नियंत्रण की जिम्मेदारी किसकी है, यह संबंधित सड़क की स्थिति, स्वीकृत शर्तों और लागू नियमों के आधार पर तय किया जाना चाहिए।

जिला प्रशासन को संबंधित कंपनियों, ट्रांसपोर्टरों और विभागों की संयुक्त बैठक बुलाकर जोगीडीपा पुल तथा बाबा धाम पहुंच मार्ग की समस्याओं पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। केवल बैठक और आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। कार्रवाई की समयसीमा और उसकी निगरानी भी तय होनी चाहिए।
जिला प्रशासन के अधीन विभाग आखिर कर क्या रहे हैं?
जिला प्रशासन को यह भी बताना चाहिए कि इन समस्याओं के संबंध में अब तक कितने बार निरीक्षण किया गया है और समाधान के लिए कितनी राशि तथा किस विभाग की जिम्मेदारी निर्धारित है।

—अब बहाने नहीं, समयसीमा के साथ कार्रवाई हो

संजय देवांगन ने मांग की कि जोगीडीपा पुल की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए और सुरक्षा संबंधी जोखिम पाए जाने पर आवश्यक यातायात प्रतिबंध, वैकल्पिक मार्ग तथा मरम्मत की व्यवस्था की जाए। बाबा धाम पहुंच मार्ग पर धूल नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभावी उपाय किए जाएं और नियमित निगरानी सुनिश्चित हो।

साथ ही, जिला प्रशासन संबंधित कंपनियों, ट्रांसपोर्टरों और विभागों की जिम्मेदारी तय करे तथा जनता के सामने कार्रवाई की समयसीमा रखे।

रायगढ़ की जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसके रोजमर्रा के आवागमन से जुड़ी समस्याओं का समाधान कब होगा। जनहित के सवालों को केवल विभागीय पत्राचार में उलझाकर नहीं छोड़ा जा सकता।
प्रशासन जनता के लिए है या जनता को प्रशासन के भरोसे छोड़ दिया गया है?

रायगढ़ की जनता उद्योगों के खिलाफ नहीं है। जनता विकास के खिलाफ नहीं है। जनता केवल इतना चाहती है कि विकास के नाम पर उसकी सुरक्षा, सुविधा और सम्मान की अनदेखी न हो।

एक ओर जर्जर पुल पर जाम और बसों की आवाजाही की चिंता है, दूसरी ओर बाबा धाम पहुंच मार्ग पर उड़ती धूल से परेशान नागरिक हैं। जब इन समस्याओं को दूर करने के लिए विभाग मौजूद हैं, अधिकारी नियुक्त हैं और प्रशासनिक व्यवस्था संचालित है, तो फिर समाधान में देरी क्यों?

क्या आम नागरिक की जान की कीमत तभी समझी जाएगी, जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा? क्या कंपनियों का मुनाफा जनता की सुरक्षा से बड़ा हो गया है? और क्या जिम्मेदार विभाग अपनी जवाबदेही निभाने के लिए किसी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं?

रायगढ़ को केवल औद्योगिक शहर नहीं, बल्कि सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित शहर बनाने की जरूरत है। जिला प्रशासन को इन मुद्दों पर तत्काल संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।

जनता की सुरक्षा कोई एहसान नहीं, प्रशासन की जिम्मेदारी है। रायगढ़ को आश्वासन नहीं—जवाबदेही, समयसीमा और जमीन पर परिणाम चाहिए।

संजय देवांगन
प्रवक्ता
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग

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