बैंकिंग, बचत और निवेश पर दिया गया प्रशिक्षण

ऋण प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के संबंध में दी गई जानकारी

रायगढ़, 28 मई 2026/ जिला जेल रायगढ़ में आज लीड बैंक कार्यालय की ओर से एक वित्तीय साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 200 कैदियों ने भाग लिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कैदियों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना, उन्हें जिम्मेदार आर्थिक व्यवहार के प्रति जागरूक करना तथा रिहाई के बाद समाज में सफल पुनर्वास की दिशा में मार्गदर्शन देना था। अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय साक्षरता कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पुनरावृत्ति (दोबारा अपराध) को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती है। कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि यदि व्यक्ति को पैसे के सही प्रबंधन की समझ हो, तो वह जेल से बाहर आने के बाद अपने जीवन को अधिक स्थिर और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ा सकता है।
शिविर में अग्रणी बैंक प्रबंधक श्री कमल किशोर सिंह ने प्रतिभागियों को व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने सरल भाषा में समझाया कि कैसे सही बजट बनाकर आय और व्यय के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है। इसके अलावा बचत की आदत विकसित करने, चक्रवृद्धि ब्याज के दीर्घकालिक लाभ और निवेश के विविध विकल्पों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को यह बताया गया कि अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करने से जोखिम को कम किया जा सकता है और वित्तीय सुरक्षा को मजबूत बनाया जा सकता है। विशेष रूप से यह भी समझाया गया कि छोटी-छोटी नियमित बचतें भविष्य में बड़ी पूंजी का रूप ले सकती हैं, यदि उन्हें सही दिशा में निवेश किया जाए।
कार्यक्रम में कैदियों को जिम्मेदारी से ऋण लेने की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें मूलधन, फ्लैट ब्याज दर, घटते-बैलेंस ब्याज दर, समान मासिक किस्त और छिपे हुए शुल्क जैसे प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर शुल्क और विलंब भुगतान शुल्क की जानकारी शामिल थी। प्रतिभागियों को यह सलाह दी गई कि ऋण लेने से पहले उसकी सभी शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और केवल अधिकृत बैंकिंग संस्थानों से ही ऋण लें। साथ ही अनौपचारिक या अवैध स्रोतों से उधार लेने से बचने पर विशेष जोर दिया गया। डिजिटल सुरक्षा सत्र में बताया गया कि किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंक पासवर्ड या अन्य व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि किसी प्रकार की धोखाधड़ी या अनधिकृत लेनदेन दिखाई दे तो तुरंत बैंक को सूचित करें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
कार्यक्रम में उप जेल अधीक्षक श्री गोवर्धन सिंह शोरी ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होते हैं। उन्होंने बताया कि वित्तीय साक्षरता से कैदी रिहाई के बाद न केवल अपने खर्चों को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर पाएंगे, बल्कि छोटे व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर भी बन सकते हैं। कार्यक्रम में आरसेटी के निदेशक भी उपस्थित रहे।

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