रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। कुछ भारतीय नागरिकों को रूस में ‘हेल्पर’ की जॉब का झांसा देकर युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार: कम से कम तीन भारतीयों को रूस-यूक्रेन सीमा पर रूसी सैनिकों के साथ लड़ने के लिए मजबूर किया गया। पीड़ितों का कहना है कि एक एजेंट ने उन्हें धोखे से सेना सुरक्षा सहायक के रूप में काम करने के लिए रूस भेजा दिया। नवंबर 2023 से लगभग 18 भारतीय नागरिक रूस-यूक्रेन सीमा पर फंसे हुए हैं। इनमें से एक युवक की युद्ध में मृत्यु भी हो गई है। यह पहली बार है जब रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की मौजूदगी की जानकारी सामने आई है। पीड़ितों का कहना: उन्हें रूस में ‘हेल्पर’ की जॉब का झांसा दिया गया था। उन्हें बताया गया था कि उन्हें युद्ध में नहीं लड़ना पड़ेगा। उन्हें धमकी दी गई कि अगर वे भागने की कोशिश करेंगे तो उन्हें मार दिया जाएगा। पीड़ितों ने बताया: उन्हें युद्ध के मैदान में भेज दिया गया और उन्हें रूसी सैनिकों के साथ लड़ने के लिए मजबूर किया गया। उन्हें हथियार दिए गए और उन्हें गोली चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें मरने या लड़ने के बीच विकल्प नहीं दिया गया। पीड़ितों में से एक ने बताया: “हम जान बचाने के लिए भागने को मजबूर हुए।” “हमने किसी भी युद्ध में भाग लेने के लिए साइन नहीं किया था।” “हमें धोखा दिया गया और हमें मौत के घाट उतार दिया गया।” भारत सरकार ने: इस मामले की जांच शुरू कर दी है। पीड़ितों को वापस लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यह मामला कई सवालों को जन्म देता है: भारतीय नागरिकों को रूस कैसे भेजा गया? उन्हें युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर क्यों किया गया? भारत सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करेगी? यह एक गंभीर मामला है और इसकी पूरी जांच की जानी चाहिए। पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए और उन्हें सुरक्षित वापस लाया जाना चाहिए।
