आजादी सात दशक बीत जाने के बाद भी पेयजल आपूर्ति की स्थिति सुदृढ़ नहीं हो पाई है। वनांचल क्षेत्राें की यह दशा और भी दयनीय है। पहाड़ से उतरकर मैदानी बसाहटो में रहने वाले कोरवा, बिरहोर जैसे धनुहार, मंझवार जनजाति के लिए आज भी ढोंढी का पानी पीकर जीवन बसर कर रहे हैं।वनांचल क्षेत्र में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को अब ढोंढी की पानी से मुक्ति मिलेगी। केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत जिले के 71 कोरवा व बिरहोर सहित अन्य आदिवासियों के विरल बसाहटों के लिए पीएचई विभाग को 6.80 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

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