पुराना बस स्टैंड चौक के करीब ही महुआ होटल का संचालन हो रहा था। इसके संचालक के निधन के बाद उनके वारिसानों के नाम पर यह जमीन आ गई। पिछले साल इस जमीन को अलग-अलग आठ वारिसानों ने नौ लोगों को करीब आठ करोड़ रुपये में बेच दी।महुआ होटल की बेशकीमती आवासीय जमीन को आठ वारिसानों ने नौ लोगों को आठ करोड़ में बेच दी। बिना रिकार्ड दुरुस्त कराए इस जमीन पर खरीदार यहां अब बड़ी-बड़ी दुकानों का निर्माण कर रहे हैं। इससे शासन को लाखों रुपये की चपत लगाई जा रही है। बेचने या फिर बाद में निर्माण शुरू करने से पहले आवासीय भूमि को व्यवसायिक मद में बदलना था। ऐसा न कर खरीदार और दलालों ने सरकार के खजाने में सेंध लगाई है।
