आगमन से विसर्जन तक उमड़ा जनसैलाब, देर रात तक गुलजार रहे पंडाल—अनोखी थीम, आकर्षक सजावट और सेवा ने जीता शहरवासियों का दिल
रायगढ़। इस बार रायगढ़ का दुर्गा उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि पूरे शहर की आस्था, उत्साह, रचनात्मकता और सामाजिक एकजुटता का ऐसा विराट उत्सव बन गया, जिसकी भव्यता को शब्दों में समेटना मुश्किल है। माता के आगमन से लेकर विसर्जन तक रायगढ़ का माहौल पूरी तरह दुर्गामय रहा। ऐसा लगा मानो पूरा शहर एक सप्ताह तक चलने वाले किसी बड़े उत्सव में बदल गया हो।
प्रकाश निगानिया ने कहा कि इस बार रायगढ़ की दुर्गा पूजा को देखकर सचमुच यह महसूस हुआ कि शहर में मिनी कलकत्ता साकार हो गया है। जिस तरह कलकत्ता की दुर्गा पूजा अपनी भव्यता, पंडालों, रोशनी, भीड़ और उत्सव के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है, उसी तरह की झलक इस बार रायगढ़ में देखने को मिली। हर पंडाल दूसरे से अलग और आकर्षक नजर आया तथा हर आयोजन समिति ने अपनी कल्पनाशीलता और मेहनत से उत्सव को एक नया स्वरूप दिया।
आगमन से ही नजर आई भव्यता
माता के आगमन का दृश्य इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। जगह-जगह शानदार आतिशबाजी, रोशनी और भव्य स्वागत ने पूरे शहर को उत्सव के रंग में रंग दिया। माता की सुंदर प्रतिमाओं के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता रहा। आगमन के दौरान जिस उत्साह और उमंग का वातावरण बना, वह लंबे समय तक रायगढ़वासियों की स्मृतियों में रहेगा।
एक से बढ़कर एक पंडाल, हर जगह अलग थी पहचान
इस बार पंडालों की सजावट ने विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींचा। कहीं भव्य जगन्नाथ मंदिर की प्रतिकृति नजर आई तो कहीं लेटर बॉक्स जैसी अनूठी थीम ने लोगों को आकर्षित किया। कहीं विशाल और आकर्षक प्रवेश द्वार तो कहीं अद्भुत विद्युत सज्जा और कलात्मक निर्माण देखने को मिला। कई पंडालों में श्रद्धालुओं के लिए बैठने की शानदार व्यवस्था भी की गई ।वास्तव में स्थिति यह रही कि एक पंडाल देखने के बाद दूसरे पंडाल को देखने की उत्सुकता बनी रही और आंखें सजावट देखकर ठहरती चली गईं।
रात दो बजे तक गुलजार रहे पंडाल
दुर्गा उत्सव के दौरान देर रात तक शहर की सड़कों पर रौनक बनी रही। कई स्थानों पर रात दो बजे तक श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद रही। परिवारों के साथ लोग पंडालों में पहुंचते रहे और माता के दर्शन के साथ भव्य सजावट का आनंद लेते रहे। सभी स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की अच्छी व्यवस्था की गई थी।पूरी-सब्जी, मिष्ठान्न, प्रसाद और पेयजल की व्यवस्था की गई। सेवा और आतिथ्य की भावना ने इस पूरे आयोजन को और विशेष बना दिया।
चार दिन नहीं, लगा जैसे पूरा शहर सप्ताहभर उत्सव में डूबा रहा
प्रकाश निगानिया ने कहा कि इस बार दुर्गा उत्सव का असर केवल पंडालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरा रायगढ़ ही उत्सव का केंद्र बन गया। चार दिनों तक शहर का माहौल ऐसा रहा जैसे पूरा शहर किसी बड़े मेले और उत्सव में तब्दील हो गया हो। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इस उत्सव का हिस्सा बने।
यह आयोजन रायगढ़ की सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता की भी मिसाल बना।
रायगढ़ की नई पहचान बन सकता है दुर्गा उत्सव
उन्होंने कहा कि रायगढ़ को अब तक दुर्गाष्टमी के लिए विशेष रूप से जाना जाता रहा है, लेकिन इस बार के आयोजन ने एक नई संभावना दिखाई है। आने वाले वर्षों में दुर्गा पूजा रायगढ़ की एक अलग पहचान बन सकती है। यदि इसी तरह आयोजन लगातार और बेहतर होते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब रायगढ़ के दुर्गा उत्सव की चर्चा प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजनों में होने लगे।
माता के आगमन से लेकर विसर्जन तक जिस तरह शहरवासियों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ भागीदारी निभाई, वह रायगढ़ की जीवंत संस्कृति और धार्मिक आस्था का प्रमाण है। इस बार रायगढ़ ने सिर्फ दुर्गा पूजा नहीं मनाई, बल्कि पूरे शहर ने मिलकर एक ऐसा उत्सव रचा है, जिसे आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा। रायगढ़ ने इस बार साबित कर दिया—आस्था जब आयोजन से जुड़ती है, तो पूरा शहर उत्सव बन जाता है।
