नगर दुल्हन की तरह सजा, भव्य पंडालों में माता रानी की अलौकिक छवि के दर्शन

खरसिया। नवरात्र के पावन पर्व पर धर्म नगरी खरसिया को दुल्हन की तरह सजाया गया है। जगमग करती रंग-बिरंगी लाइटें सबका मन मोह रही हैं। नगर में जगह-जगह बने दुर्गा पंडालों में माता रानी की अलौकिक छवि और मनोरम दरबार देखने को मिल रहा है। हर दिन नगर में भंडारों का आयोजन किया जा रहा है।

नगर के प्रमुख दुर्गा पंडाल –

1. शीतला नगर दुर्गा उत्सव समिति, हमालपारा – 38 वर्ष पुरानी परंपरा
यहां हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बेहद खूबसूरत और अनुपम झांकियां बनाई गई हैं। यहां 38 वर्षों से लगातार प्रतिमा स्थापित की जा रही है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं।

2. नव दुर्गा उत्सव समिति, कन्या भवन – 27 वर्ष से सेवा
कन्या भवन समिति द्वारा बहुत ही खूबसूरत पंडाल बनाकर 27 वर्षों से माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है।

3. श्री नव दुर्गा पूजा उत्सव समिति, गंज बाजार – 45 वर्ष पुरानी परंपरा
गंज बाजार समिति द्वारा लगभग 45 वर्षों से प्रतिमा स्थापित कर माता की सेवा की जा रही है। यहां हर दिन मेले जैसा माहौल रहता है और भारी भीड़ उमड़ती है।

4. जय भवानी दुर्गा उत्सव समिति, महुआपाली रोड – 25 वर्षों से अधिक
महुआपाली रोड समिति द्वारा पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से दुर्गा प्रतिमा स्थापित की जा रही है। यहां हर साल भव्य और आकर्षक पंडाल बनाया जाता है।

5. सिविल लाइन पोस्ट ऑफिस रोड – नगर की सबसे बड़ी प्रतिमा
नगर की सबसे बड़ी प्रतिमा सिविल लाइन पोस्ट ऑफिस रोड में स्थापित की जाती है, जिसकी देखरेख महिलाओं की टोली द्वारा की जाती है। भव्य प्रतिमा होने की वजह से भक्त देर तक माता रानी को निहारते रहते हैं।

6. जय दुर्गा उत्सव समिति, गंज पीछे – 50 वर्ष से खड़ी दुर्गा के नाम से प्रसिद्ध
गंज पीछे में भी विगत 50 वर्षों से दुर्गा उत्सव मनाया जा रहा है। यहां की दुर्गा प्रतिमा खड़ी दुर्गा के नाम से पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है।

7. नवयुवक दुर्गा उत्सव समिति, स्टेशन चौक – 46 वर्ष पुरानी, प्रसाद है प्रसिद्ध
स्टेशन चौक समिति द्वारा आज से 46 वर्ष पूर्व दुर्गा प्रतिमा स्थापित की गई थी। अब यह कार्य दूसरी पीढ़ी के लोग संभाल रहे हैं। इस बार पंडाल को हाथ में बांधने वाले कलावा (मौली) से सजाया गया है। यहां के भंडारे का प्रसाद पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है, जिसे लेने भक्त दूर-दूर से आते हैं।

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