बाढ़, सर्पदंश और आकाशीय बिजली से बचाव के साथ डायरिया, मलेरिया व डेंगू की रोकथाम पर हुई विस्तृत चर्चा

राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आयोजित हुई एक दिवसीय कार्यशाला

रायगढ़, 8 अगस्त 2026/ राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत चिकित्सा अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में वर्षा ऋतु के दौरान उत्पन्न होने वाली आपदाओं एवं मौसमी बीमारियों से बचाव, रोकथाम तथा प्रभावी स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर चिकित्सा अधिकारियों को आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यशाला में विशेष रूप से मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति में उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की गई। बाढ़ के बाद दूषित जल एवं भोजन के सेवन से होने वाली बीमारियों, संक्रमण के फैलाव तथा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, साफ-सफाई, व्यक्तिगत स्वच्छता तथा संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में भी बताया गया।

सर्पदंश एवं आकाशीय बिजली से बचाव की दी गई जानकारी

वर्षा ऋतु में सर्पदंश की घटनाओं की आशंका को देखते हुए चिकित्सा अधिकारियों को सर्पदंश से बचाव एवं रोकथाम के उपायों की जानकारी दी गई। लोगों को सर्पदंश की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेने, झाड़-फूंक अथवा किसी भी प्रकार के घरेलू उपचार से बचने तथा समय पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने के संबंध में जागरूक करने पर जोर दिया गया। इसी प्रकार आकाशीय बिजली एवं गर्जना के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी भी दी गई। खुले स्थानों, पेड़ के नीचे तथा बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने, मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर रहने तथा आकाशीय बिजली से प्रभावित व्यक्ति को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक जानकारी साझा की गई।

डायरिया, पीलिया, हेपेटाइटिस, मलेरिया और डेंगू की रोकथाम पर जोर

कार्यशाला में वर्षा ऋतु में अधिक सामने आने वाली अन्य मौसमी बीमारियों के संबंध में भी चिकित्सा अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें डायरिया, उल्टी-दस्त, पीलिया, हेपेटाइटिस, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार के बारे में चर्चा की गई।चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मौसमी बीमारियों की स्थिति पर सतत निगरानी रखें तथा संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान कर आवश्यक जांच एवं उपचार सुनिश्चित करें। जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए लोगों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल के उपयोग, भोजन को ढककर रखने, हाथों की नियमित सफाई तथा आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक करने पर भी बल दिया गया। मलेरिया एवं डेंगू की रोकथाम के लिए मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने, घरों एवं आसपास पानी जमा नहीं होने देने तथा बुखार आने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने के लिए लोगों को प्रेरित करने की बात कही गई। कार्यशाला का उद्देश्य वर्षा ऋतु में संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति चिकित्सा अधिकारियों को तैयार करना तथा जिले में आपदा एवं मौसमी बीमारियों की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना रहा।

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