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प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक : 26 जून 2026

रायगढ़। जिला कांग्रेस महामंत्री वसीम खान ने भाजपा द्वारा आपातकाल दिवस मनाए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र की दुहाई देने वाली भारतीय जनता पार्टी को पहले देश की जनता के सामने पिछले एक दशक का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा, किसान, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी, महिलाएं, आदिवासी, गरीब और मध्यम वर्ग अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। भाजपा सरकार इतिहास की घटनाओं को याद दिलाने में व्यस्त है, जबकि जनता वर्तमान की समस्याओं का समाधान चाहती है।

वसीम खान ने कहा कि यदि आज देश की वास्तविक तस्वीर देखी जाए तो सबसे पहले युवाओं का भविष्य संकट में दिखाई देता है। लाखों शिक्षित युवक-युवतियां वर्षों तक कठिन परिश्रम करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन बार-बार होने वाले पेपर लीक, भर्ती घोटालों और भर्तियों में देरी ने उनकी मेहनत और सपनों को तोड़ दिया है। अनेक परीक्षाएं रद्द हुईं, युवाओं को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी और उनके जीवन के बहुमूल्य वर्ष बर्बाद हो गए। सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें केवल आश्वासन देती रही।

उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी लगातार बढ़ती चिंता का विषय बनी हुई है। लाखों सरकारी पद वर्षों से खाली पड़े हैं, लेकिन नियमित भर्ती नहीं हो रही। संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था को बढ़ावा देकर स्थायी रोजगार के अवसर कम किए जा रहे हैं। निजी क्षेत्र में भी अपेक्षित रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे देश का युवा स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

वसीम खान ने कहा कि महंगाई ने आम नागरिक का जीना मुश्किल कर दिया है। रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि का सीधा असर हर परिवार पर पड़ा है। खाद्य तेल, दाल, दूध, सब्जियां, दवाइयां और दैनिक उपयोग की वस्तुएं लगातार महंगी होती जा रही हैं। गरीब और मध्यम वर्ग अपनी आय का बड़ा हिस्सा केवल घर चलाने में खर्च करने को मजबूर है।

उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया था, लेकिन आज किसान बढ़ती लागत, महंगे खाद-बीज, डीजल, बिजली और सिंचाई के खर्च से परेशान है। कई किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है। कृषि आज भी संकट से बाहर नहीं निकल पाई है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी का सबसे अधिक नुकसान छोटे व्यापारियों, लघु उद्योगों और असंगठित क्षेत्र के लाखों लोगों को उठाना पड़ा। हजारों छोटे उद्योग बंद हुए, लाखों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ और छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति आज तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र के अनेक उपक्रमों, हवाई अड्डों, रेलवे सेवाओं, बंदरगाहों तथा अन्य राष्ट्रीय संपत्तियों के निजीकरण की प्रक्रिया ने देशभर में गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि देश की सार्वजनिक संपत्तियों को धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंपा जा रहा है, जिससे आम जनता और कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं।

वसीम खान ने आरोप लगाया कि आज जल, जंगल और जमीन भी सुरक्षित नहीं हैं। देश के अनेक आदिवासी क्षेत्रों में विकास के नाम पर हरे-भरे जंगलों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राकृतिक संसाधनों और खनिज संपदा को सरकार अपने करीबी उद्योगपति मित्रों के हित में उपलब्ध करा रही है, जबकि पीढ़ियों से जंगलों पर आश्रित आदिवासी समाज को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर आदिवासी समुदायों को उनके पारंपरिक क्षेत्रों से हटाने के प्रयास हुए हैं और अपने अधिकारों की आवाज उठाने वाले आदिवासियों पर पुलिस कार्रवाई तथा अत्याचार की शिकायतें भी सामने आई हैं। जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, अस्मिता और जीवन का आधार हैं। यदि जंगलों को समाप्त किया जाएगा और आदिवासियों के अधिकारों को कुचला जाएगा, तो यह संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय और पर्यावरण—तीनों के साथ अन्याय होगा।

उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं आम नागरिक की पहुंच से लगातार दूर होती जा रही हैं। निजी शिक्षा और निजी अस्पतालों का खर्च तेजी से बढ़ा है। गरीब और मध्यम वर्ग के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर इलाज प्राप्त करना लगातार कठिन होता जा रहा है।

वसीम खान ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार के आरोप, भर्ती घोटाले, कानून-व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द, बढ़ती आर्थिक असमानता तथा रुपये की कमजोरी जैसे अनेक मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बचती रही है। आज गरीब और अमीर के बीच की खाई लगातार बढ़ती जा रही है और मध्यम वर्ग सबसे अधिक आर्थिक दबाव झेल रहा है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की प्रतिष्ठा केवल बड़े-बड़े भाषणों से नहीं, बल्कि मजबूत अर्थव्यवस्था, रोजगार, सामाजिक सद्भाव, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और जनता के विश्वास से बनती है। सरकार को अतीत की राजनीति करने के बजाय वर्तमान की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करना चाहिए।

वसीम खान ने भाजपा से पूछा कि—

  • युवाओं को रोजगार कब मिलेगा?
  • भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक पूरी तरह कब रुकेगा?
  • सरकारी विभागों के लाखों रिक्त पद कब भरे जाएंगे?
  • महंगाई से जनता को राहत कब मिलेगी?
  • गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की कीमतें कब कम होंगी?
  • किसानों की आय बढ़ाने का वादा कब पूरा होगा?
  • छोटे व्यापारियों और लघु उद्योगों को राहत कब मिलेगी?
  • जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा कब होगी?
  • हरे-भरे जंगलों की अंधाधुंध कटाई कब रुकेगी?
  • शिक्षा और स्वास्थ्य को आम नागरिक की पहुंच में कब लाया जाएगा?
  • सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण पर सरकार अपनी स्पष्ट नीति कब बताएगी?
  • गरीब, मजदूर और मध्यम वर्ग को आर्थिक राहत कब मिलेगी?

अंत में वसीम खान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता, पर्यावरण संरक्षण तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सदैव संघर्ष करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा कि आज देश की जनता इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान का हिसाब मांग रही है। जनता जानना चाहती है कि रोजगार कहां है, महंगाई क्यों बढ़ रही है, किसानों की आय क्यों नहीं बढ़ी, युवाओं का भविष्य क्यों असुरक्षित है, सार्वजनिक संपत्तियां क्यों निजी हाथों में जा रही हैं, जंगल क्यों कट रहे हैं और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा क्यों नहीं हो रही है।

उन्होंने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में लोकतंत्र की पक्षधर है तो उसे इतिहास की घटनाओं पर राजनीति करने के बजाय वर्तमान की इन ज्वलंत समस्याओं का जवाब देश की जनता को देना चाहिए। लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और अब जनता जवाब मांग रही है।

जारीकर्ता
वसीम खान
जिला कांग्रेस महामंत्री, रायगढ़

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