तमनार -तमनार क्षेत्र के गारे पालमा सेक्टर-1 परियोजना को लेकर प्रस्तावित जनसुनवाई भले ही प्रशासनिक कारणों से निरस्त हुए एकनमाह से ज्यादा हो गया है, लेकिन क्षेत्र के ग्रामीणों में इस परियोजना को लेकर असंतोष और विरोध का माहौल आज भी यथावत बना हुआ है।
परियोजना से प्रभावित होने वाले 14 ग्रामों के ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई निरस्त होने पर भी उनकी आशंकाएं समाप्त नहीं हुई हैं। ग्रामीण अब भी अपनी जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं और परियोजना के कारण होने वाले पर्यावरणीय नुकसान, विस्थापन तथा आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंतित हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब तक उन्हें परियोजना से जुड़ी वास्तविक जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध नहीं कराई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता और उन्हें पूर्ण विश्वास में नहीं लिया जाता, तब तक वे किसी भी स्थिति में अपनी जमीन देने के लिए सहमत नहीं होंगे।
क्षेत्र में यह भी देखने को मिला कि जनसुनवाई निरस्त होने के बावजूद ग्रामीण एकजुट हैं और आगे भी अपने हक एवं अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी प्रकार का निर्णय लेने से पूर्व प्रभावित परिवारों की सहमति और चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।
वहीं दूसरी ओर संस्थान के सक्षम अधिकारीयों से इस विषय और आने वाले समय में कंपनी के निर्णय पर परिचर्चा से ज्ञात हुआ कि ग्रामीणों के विरोधों और उनके मध्य के कुछ स्वार्थी तत्वों और नकारात्मक राजनीती से प्रेरित होकर भारी उपद्रव, आगजनी कर संस्था के माइंस कार्यालय को भारी नुक्सान पहुंचाया गया। कंप्यूटर, दस्तावेजों, सर्वे उपकारणों को जलाकर संस्था के कर्मचारियों के साथ मारपीट कर उन्हें गंभीर रुप से घायल कर दिया गया, जिनका उपचार चल रहा है। ग्रामीणों के मध्य छिपे इन उपद्रवियों के खिलाफ आज पर्यंत कोई करवाई नहीं हुई है और आज भी वे स्वतंत्र, निर्भीक होकर समाज में घूम रहें है और दहशत फैला रहें हैँ।

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