आदिवासी संस्कृति, मातृभाषा और परंपराओं के संरक्षण का दिया संदेश

रायगढ़, 9 अगस्त 2026/ प्रयास आवासीय विद्यालय में विश्व आदिवासी दिवस उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रायगढ़ की सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) श्रीमती साधना सिंह उपस्थित रहीं। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपनी मातृभाषा, संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़े विचार साझा करते हुए आदिवासी गौरव और विरासत को जीवंत किया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती साधना सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, भाषा, परंपराएं और जीवनशैली भारत की अमूल्य धरोहर हैं। आदिवासी समुदाय ने सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की परंपरा को संजोकर रखा है। उनके लिए जंगल केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है, नदी संस्कृति का हिस्सा है और धरती मां के समान पूजनीय है। उन्होंने वर्ष 1859 में बस्तर के नांगुल दोरला के नेतृत्व में हुए “कोई विद्रोह” का उल्लेख करते हुए बताया कि आदिवासी समाज ने साल वृक्षों की कटाई का साहसपूर्वक विरोध किया था। यह ऐतिहासिक आंदोलन जल, जंगल और जमीन के प्रति आदिवासी समाज के गहरे जुड़ाव तथा प्रकृति संरक्षण की भावना का प्रेरक उदाहरण है। श्रीमती साधना सिंह ने भगवान बिरसा मुंडा, वीर नारायण सिंह, सिद्धू-कान्हू, तिलका मांझी और रानी दुर्गावती जैसे महान आदिवासी वीरों के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि इन वीरों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से इन महान व्यक्तित्वों के संघर्ष, साहस और त्याग से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

अपनी मातृभाषा में विद्यार्थियों ने साझा किए विचार, संस्कृति पर जताया गर्व

श्रीमती साधना सिंह ने आदिवासी अंचल से निकलकर कठिन परिस्थितियों और विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य तक पहुंचने की अपनी प्रेरक जीवन-यात्रा भी विद्यार्थियों के साथ साझा की। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, दृढ़ संकल्प, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा को अपने जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बनाकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनके प्रेरणादायी उद्बोधन से प्रभावित होकर अनेक विद्यार्थियों ने मंच पर आकर अपनी-अपनी मातृभाषा में आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों पर विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों की सहज, प्रभावशाली और आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष एवं यादगार बना दिया। विद्यार्थियों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व व्यक्त करते हुए नई पीढ़ी को अपनी भाषा और परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर प्रशासकीय अधिकारी श्री के. एन. तिवारी, छात्रावास अधीक्षक श्री एकेश्वर गनातिया, छात्रावास अधीक्षिका श्रीमती भावना पटेल सहित विद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। विद्यालय परिवार ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपनी संस्कृति, मातृभाषा और परंपराओं पर गर्व करने के लिए प्रेरित किया।

प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का लिया संकल्प

विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत के प्रति सम्मान के साथ-साथ समानता, संवेदनशीलता, प्रकृति-प्रेम और सभी संस्कृतियों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना रहा। कार्यक्रम में जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए जागरूक रहने तथा अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि “आदिवासी संस्कृति का सम्मान, प्रकृति और मानवता का सम्मान है।

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