स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी 2016 से 2022 तक की ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां पाई गई हैं। मार्च-2022 को समाप्त वर्ष तक के लिए तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन कंपनियों ने घटिया दवा की सप्लाई की, उनसे क्वालिटी वाली दवा लेना तो दूर न तो 1.69 करोड़ जुर्माना लगाया और न ही 24.60 लाख डैमेज शुल्क लिया गया।छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस निगम लिमिटेड (सीजीएमएससीएल) की लापरवाही से 33.63 करोड़ की दवा एक्सपायर हुई है। वहीं, 49.68 करोड़ के उपकरण अनुपयोगी पड़े है। यहीं नहीं 24 करोड़ की दवाएं ब्लैक लिस्टेड कंपनियों से खरीदी गई है। कोरोना काल के दौरान बिना अनुशंसा के 23.13 करोड़ रुपये की दवाएं खरीदी गई है।
