*आयुष यूनिवर्सिटी ले रहा नियम विरुद्ध निर्णय*
छत्तीसगढ़ में स्टेट नर्सिंग काउंसिल और आयुष यूनिवर्सिटी में समन्वय की कमी है ।जिन कॉलेजों को स्टेट नर्सिंग काउंसिल ने अनुमति दी है, आयुष यूनिवर्सिटी ने उनको खारिज करते हुए इंडियन नर्सिंग काउंसिल नई दिल्ली की सूटेबिलिटी का हवाला देते हुए अत्यंत कम सीट की संबद्धता जारी की है,इंडियन नर्सिंग काउंसिल स्वयं कहता है ,उसके एक्ट की धारा 13 और 14 के अनुसार स्टेट नर्सिंग काउंसिल के द्वारा अनुमति प्राप्त कॉलेज को सूटेबिलिटी दी जाती है ,ना कि संबंधित विश्वविद्यालय के द्वारा ।इस वर्ष नर्सिंग काउंसलिंग में जो देरी हुई इसकी पूरी जिम्मेदारी आयुष विश्वविद्यालय की बनती है ।छत्तीसगढ़ में नर्सिंग महाविद्यालय का निरीक्षण पांच माह पूर्व हो गया था, लेकिन आयुष विश्वविद्यालय ने अक्टूबर माह में कुछ कॉलेजेस को संबद्धता जारी की, जबकि इंडियन नर्सिंग काउंसिल के अनुसार अगस्त-सितंबर में काउंसलिंग हो जानी चाहिए थी । आयुष विश्वविद्यालय के द्वारा देरी से संबद्धता जारी करने के पीछे- कारण क्या है ? यह चर्चा का विषय बना हुआ है …..??स्वयं आयुष विश्वविद्यालय इंडियन नर्सिंग काउंसिल के नियम का पालन नहीं कर रहा है। पूर्व में स्थापित और नवीन नर्सिंग महाविद्यालय की दूरी 10 किलोमीटर से ज्यादा होनी चाहिए, लेकिन कुछ कॉलेज को सत्र 26-27 के अनुमति जारी की गई है, जिसमें स्वयं शासकीय नवीन नर्सिंग महाविद्यालय रायगढ़ में पुसौर में नवीन नर्सिंग महाविद्यालय जो स्थापित हुआ है, उसकी दूरी मां मंगला कॉलेज आफ नर्सिंग से 10 किलोमीटर की सीमा में है,एक और आयुष विश्वविद्यालय इंडियन नर्सिंग काउंसिल के नियमों का पालन करने की बात करता है ,और दूसरी ओर स्वयं इंडियन नर्सिंग कॉलेज के नियमों का पालन नहीं कर कर रहा है। सूत्रों से पता चला है, आयुष विश्वविद्यालय का कहना है , बोर्ड ऑफ मैनेजमैंट ने यह निर्णय लिया है । विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है ,कि किसी भी नवीन महाविद्यालय की संबद्धता हेतु कॉलेज को 31 जुलाई के पहले विश्वविद्यालय में आवेदन करना होता है, किंतु इस वर्ष 4 से 5 नए निजी नर्सिंग कालेजों को लाभ पहुंचाने के लिए विशेष रूप से 5 अक्टूबर को बोर्ड आफ मैनेजमेंट की मीटिंग आयोजित की, और एक्सिक्यूटिव काउंसिल के पूर्व में लिए गए निर्णय को पलटते हुए विश्वविद्यालय अपनी सुविधा अनुसार कुछ विशेष लोगों को लाभ पहुंचाने की नीयत से अपने अधिनियम को तोड़ मरोड़ लेती है, और अनेक उटपटांग निर्णय ले लेती है, जिन नियमों को बदलना रहता है, उसे अपने सुविधानुसार बदल ले रही है
