संगठन के प्रति समर्पण और सक्रिय कार्यशैली से भाजपा में बनाई अलग पहचान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ हेलीपेड पर दिखी नजदीकी,सीएम के साथ उड़ान बनी चर्चा का विषय
रायगढ़ – छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़े और रायगढ़ शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय अशोक अग्रवाल ने कांग्रेस छोड़कर जब भाजपा का दामन थामा था, तब राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।कांग्रेस से जुड़े उनके पुराने साथी और समर्थक यह तंज कसने से भी नहीं चूकते थे कि भाजपा में जाने के बाद उन्हें केवल पीछे की पंक्ति में खड़े रहने का अवसर मिलेगा।हालांकि, समय के साथ अशोक अग्रवाल ने अपनी कार्यशैली और संगठन के प्रति समर्पण से इन तमाम चर्चाओं को पीछे छोड़ दिया।
भाजपा में प्रवेश के बाद पार्टी संगठन ने उनकी सक्रियता, राजनीतिक अनुभव और कार्य करने की क्षमता को समझते हुए उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देना शुरू किया। कम समय में ही अशोक अग्रवाल ने पार्टी के कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई और लगातार क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करते नजर आए।
भाजपा ने उन्हें लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र के रोडोपाली क्षेत्र की संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी है। इस जिम्मेदारी को अशोक अग्रवाल लगातार सक्रियता के साथ निभाने में जुटे हुए हैं। क्षेत्र में कार्यकर्ताओं से संपर्क, संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी और पार्टी के प्रति समर्पण ने उन्हें भाजपा के भीतर एक सक्रिय और भरोसेमंद कार्यकर्ता के रूप में स्थापित करना शुरू कर दिया है।
राजनीति में किसी नेता की सक्रियता का आकलन केवल पद से नहीं, बल्कि संगठन के बीच उसकी स्वीकार्यता और लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों से भी होता है। इसी लिहाज से देखा जाए तो भाजपा में प्रवेश के बाद अशोक अग्रवाल की राजनीतिक सक्रियता में तेजी आई है। संगठन ने जिस भरोसे के साथ उन्हें जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वे पूरी गंभीरता के साथ निभाने का प्रयास कर रहे हैं।
हाल ही में रायगढ़ प्रवास पर आए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ हेलीपेड पर उनकी मौजूदगी के साथ उनके साथ रायपुर तक कि उड़ान भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।मुख्यमंत्री के साथ उनकी यह तस्वीर और निकटता सोशल मीडिया तथा स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में भी दिखाई दी।इसे भाजपा संगठन में अशोक अग्रवाल की बढ़ती सक्रियता और राजनीतिक स्वीकार्यता के तौर पर देखा जा रहा है।
अशोक अग्रवाल की खासियत यह भी मानी जा रही है कि वे लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय समीकरणों को अच्छी तरह समझते हैं। इसी अनुभव का उपयोग अब वे भाजपा संगठन को मजबूत करने में कर रहे हैं। पार्टी के कार्यक्रमों से लेकर जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद तक उनकी सक्रियता लगातार दिखाई दे रही है।
कभी कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे अशोक अग्रवाल का भाजपा में आने के बाद जिस तरह राजनीतिक प्रभाव बढ़ता नजर आ रहा है, वह निश्चित रूप से उनके पुराने राजनीतिक साथियों के लिए भी एक संदेश माना जा सकता है। उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की है कि राजनीति में किसी नेता की भूमिका और कद केवल इस बात से तय नहीं होता कि वह किस पंक्ति में खड़ा है, बल्कि उसकी मेहनत, संगठन के प्रति निष्ठा और जिम्मेदारी निभाने की क्षमता ही उसकी वास्तविक पहचान बनाती है।
फिलहाल, भाजपा संगठन में अशोक अग्रवाल की बढ़ती सक्रियता और उन्हें मिल रही जिम्मेदारियों ने रायगढ़ की स्थानीय राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है। उनका संकल्प रायगढ़ में कांग्रेस मुक्त का है वे इस अभियान में लगे हुए हैं धीरे धीरे कांग्रेस कार्यकर्ता उनके कार्यों से प्रसन्न भी होते दिख रहे हैं बता दें कि पिछले वर्ष हुए पंचायत चुनाव में उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओ को भाजपा में शामिल कर उन्होंने अपनी राजनीति शक्ति का परिचित भली भांति दे ही चुके हैं।रायगढ़ जनपद के 25 सदस्यों वाली जनपद में प्रभार मिलने पश्चात कांग्रेस के 9 सदस्यों को भाजपा प्रवेश करा कर अशोक अग्रवाल अपनी लोहा मनवा चुके है।
ऐसा कहना भी गलत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में कई और कांग्रेसी नेताओं को वे भाजपा में ला सकते हैं।
आने वाले समय में संगठन के भीतर उनकी भूमिका और राजनीतिक सक्रियता किस दिशा में आगे बढ़ती है,इस पर राजनीतिक जानकारों और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है।

