सेवा भारती समिति रायगढ़ के मार्गदर्शन में महिला समन्वय रायगढ़ द्वारा तीन दिवसीय भव्य आयोजन
- 17, 18 और 19 अक्टूबर को प्रतिदिन शाम 7:00 बजे से दिखेगा सनातन संस्कृति का उल्लास
रायगढ़। संस्कारधानी रायगढ़ की पावन धरा पर आगामी 17 अक्टूबर से भक्ति, शक्ति और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। स्थानीय नटवर स्कूल के विशाल प्रांगण में माँ खड़्ग धारिणी का भव्य दरबार सजाया जा रहा है, जहाँ तीन दिवसीय भव्य सनातनी गरबा महोत्सव का आयोजन होगा। यह गरिमामयी आयोजन सेवा भारती समिति के मार्गदर्शन में ‘महिला समन्वय रायगढ़’ द्वारा संपन्न कराया जा रहा है।
1500 मातृशक्तियां एक ताल में करेंगी गरबा
इस त्रिदिवसीय महाआयोजन की प्रमुख विशेषता पारंपरिक और सनातनी मूल्यों पर आधारित गरबा नृत्य होगी। 17, 18 एवं 19 अक्टूबर को प्रतिदिन शाम 7:00 बजे से शहर व आसपास के अंचलों की लगभग 1500 बालिकाएं एवं मातृशक्तियां एक ही प्रांगण में, एक ही लय-ताल में माँ जगदम्बा की आराधना करते हुए गरबा प्रस्तुत करेंगी। भारतीय वेशभूषा और मर्यादा के अनुरूप होने वाला यह प्रदर्शन शहरवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
तैयारियां अंतिम चरण में
आयोजन समिति ने बताया कि नटवर स्कूल मैदान में भव्य पंडाल, माँ खड़्ग धारिणी का आकर्षक दरबार, विशेष प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि विस्तारक यंत्रों की व्यापक व्यवस्था की जा रही है। सुरक्षा, स्वच्छता और दर्शकों के बैठने की सुव्यवस्थित व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रतिभागी मातृशक्तियों द्वारा पिछले कई दिनों से इसका सघन अभ्यास भी किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम को भव्यता एवं दिव्यता देने के लिए मां आदिशक्ति खड़्ग धारिणि गरबा संचालन समिति का गठन किया गया है। जिसकी संयोजिका श्रीमती निवेदिता पटनायक एवं सहसंयोजिका श्रीमती सोहिता बाजपेई एवं सुश्री रुचि मिश्रा है। इस समिति की प्रचार प्रमुख श्रीमती विनीता अग्रवाल, समिति की कोषाध्यक्ष श्रीमती आरती जयसवाल एवं समिति के अन्य सदस्य में श्रीमती सुजाता साहू, श्रीमती स्नेहा तिवारी श्रीमती एवं श्रीमती किरण चौहान है। विगत एक माह से नटवर स्कूल के डोम एरिया में प्रतिदिन शाम 5:00 बजे से कुशल प्रशिक्षकों द्वारा गरबा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। समिति के सदस्यों ने नगर के सभी धर्मप्रेमी नागरिकों, परिवारों और प्रबुद्धजनों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर माँ खड़्ग धारिणी के दर्शन-पूजन का लाभ लें तथा मातृशक्तियों के इस सनातनी अनुष्ठान के साक्षी बनकर उनका उत्साहवर्धन करें।
