प्रत्येक वर्ष की तरह इस साल भी छत्तीसगढ़ में नर्सिंग काउंसलिंग जो इंडियन नर्सिंग काउंसिल के अनुसार सितंबर माह में होनी थी ना हो सकी । इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने अक्टूबर माह का समय
सुनिश्चित किया है । छत्तीसगढ़ राज्य में 7 अक्टूबर बीत जेने के बावजूद भी ,ना तो स्टेट नर्सिंग काउंसिल के द्वारा संस्थाओं को सत्र 26 – 27 के लिए अनुमति दी गई है न ही आयुष यूनिवर्सिटी के द्वारा ।
नर्सिंग संस्थाओं का निरीक्षण चार माह पूर्व हो चुका है ,
लेकिन देरी क्यों की जा रही है यह एक रहस्य बना हुआ है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन ने सत्र 26- 27 के लिए 8 नवीन शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय की स्थापना की है l
इन संस्थानों की ना तो इंडियन नर्सिंग काउंसिल के अनुसार भवन है , न नहीं टीचिंग स्टाफ पूरे हैं और न ही हॉस्पिटल परमिशन ठीक से दी गई है ।
शायद इसीलिए काउंसलिंग को इस सत्र के लिए घसीटा जा रहा है ।
जो विद्यार्थी नर्सिंग करने में इच्छुक थे नर्सिंग काउंसलिंग में विलंब होने के कारण विभिन्न दूसरे पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले चुके हैं ।
प्राइवेट नर्सिंग महाविद्यालय में जो शिक्षक थे उनका शासकीय नवीन नर्सिंग महाविद्यालय में नियुक्ति की गई है । छत्तीसगढ़ शासन नर्सिंग काउंसलिंग को लेकर कितना गंभीर है यह इसी से मालूम चलता है कि प्रत्येक वर्ष समय पर काउंसलिंग नहीं कराई जाती जबकि अन्य विषयों की मेडिकल , डेंटल, फिजियोथैरेपी की काउंसलिंग सुचारू रूप से कराई जाती है ।
देखा गया है कि शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय की सीट भर जाती हैं किंतु प्राइवेट नर्सिंग महाविद्यालयों को एक-एक स्टूडेंट के लिए मेहनत करनी पड़ती है।
भारत सरकार MBBS या PG की सीट खाली न जाए इसके लिए सारी मेहनत करती है लेकिन नर्सिंग की सीट जब खाली रहती हैं तो इसके लिए न हीं राज्य सरकार और ना ही भारत सरकार सोचती है जबकि कोरोना काल में सबसे ज्यादा मेहनत नर्सिंग स्टॉफ ने की थी लोगों की जिंदगी बचाने के लिए ।
विशेष सूत्रों से जानकारी मिल रही है छत्तीसगढ़ राज्य में नर्सिंग काउंसलिंग को देरी से करने के पीछे को विशेष कारण है ।

