छत्तीसगढ़ में AFRC और छग निजि
विश्वविद्यालय विनियामक आयोग(PURC) के बीच टालमटोल प्रवृत्ति के कारण छात्र जो निजी विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें मनमानी फीस देनी पड़ रही है, प्रदेश के समस्त निजी वि. वि. द्वारा संचालित व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु शुल्क का निर्धारण छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्था (प्रवेश का विनियमन एवं शुल्क का निर्धारण) अधिनियम, 2008 के अंतर्गत गठित प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति, रायपुर के माध्यम से ही होना है, न की छग निजी विश्व विद्यालय विनियामक आयोग के द्वारा।
छत्तीसगढ़ शासन के स्पष्ट Act होने के बावजूद भी AFRC अपनी जिम्मेदारियां से बचने का प्रयास कर रही है,
AFRC के पूर्व चेयरमैन द्वारा भी स्पष्ट किया गया है, कि फीस तय करने का अधिकार AFRC के अंतर्गत आता है, इसी अधिकार के तहत AFRC ने 13 सितंबर 2024 को निजि विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को पत्र लिखकर सूचना दी थी, और उसके पश्चात
सचिव, निजि विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने निजि विश्वविद्यालय के समस्त कुलसचिवों को 23 जून 2025 को ही पत्र लिख दिया था,कि फीस AFRC से ही तय कराना है, और तो और तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने भी मंत्रालय को स्पष्ट प्रतिवेदन दे दिया है,कि फीस AFRC ही तय करेगी।
सन् 2008 में केंद्र शासन के निर्देश पर देश के सभी राज्यों में प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति AFRC का गठन हुआ था जिसका मूल उद्देश्य राज्य के सभी निजी व शासकीय विश्वविद्यालय में संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों जैसे – MBA,B.E, Pharmacy B.Tech ,B.Ed., M.Ed., M.C.A, B.P.Ed, M.P.Ed. B.Arch की फीस तय करना था। दुःखद है की आज 18 साल भी यह लागू नहीं हो पा रहा है।
छत्तीसगढ़ शासन को गंभीरता से इस विषय पर निर्णय लेना चाहिए की व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के शुल्क निर्धारण प्रक्रिया में एकरूपता, पारदर्शिता एवं विधिसम्मत व्यवस्था सुनिश्चित की जाये और लाखों छात्रों से जुड़े इस विषय को प्रशासनिक प्रक्रिया में उलझाकर वर्षों से छात्रों का शोषण जो हो रहा है उसे रोका जाए।
