रायगढ़ । छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के आम लोगों में रायगढ़ का जन्माष्टमी मेला एक विशिष्ट स्थान रखता है जिसका लोग साल भर से बेसब्री से इंतजार करते हैं । दशकों से आयोजित इस मेले की विशिष्टता इसकी अत्यंत आकर्षक झांकियां होती हैं वहीं दूसरी ओर डिजनीलैंड जैसे मनोरंजन के साधनों का भी अपना विशिष्ट आकर्षण होता है जिसका लुत्फ उठाने के लिए गांव देहातों से आम लोग टूट पड़ते हैं । मालूम हो कि रायगढ़ में इस मेले की तैयारी जन्माष्टमी से कई सप्ताह पहले से ही शुरू हो जाती है । डिजनीलैंड के आयोजक निर्धारित स्थानों पर पहले से ही अपने डेरे डंडे के साथ पहुंच जाते हैं और अपनी तैयारियां शुरू कर देते हैं । इस बार भी डिजनीलैंड के आयोजकों ने सावित्री नगर एवं अन्य अपनी तैयारियां शुरू कर दीं और साथ ही प्रशासन से तत्संबंधी अनुमति के लिए आवेदन भी कर दिया । पर प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रशासन ने इस बार मेले की अनुमति देने से इनकार कर दिया और अनुमति आवेदन निरस्त कर दिया । इस खबर से जहां डिजनीलैंड मेले के आयोजकों में निराशा की भावना आ गई वहीं आम लोगों में में हताशा के साथ आक्रोश व्याप्त हो गया है । आप को बता दें कि इस मेले के साथ हजारों लोगों का आर्थिक पक्ष भी जुड़ा है जिसका साल भर से लोग इंतजार करते हैं । इन लोगों पर तो प्रशासन के इस कदम से मानों कुठारापात हो गया है। आम लोगों में चर्चा है कि रायगढ़ की इस परंपरा को खत्म करने के पीछे आखिर प्रशासन की क्या मंशा है ? आम लोगों द्वारा इस मेले को निरस्त नहीं किए जाने बाबत आवेदन भी प्रशासन को को सौंपा गया है जिससे आम जन भावना का परिचय मिलता है । वहीं इस बात की चर्चा भी है कि अब रायगढ़ वासी रायगढ़ विधायक और शासन के लोकप्रिय मंत्री ओ पी चौधरी के पास मेले को निरस्त नहीं किए जाने की अपनी मांग लेकर जानेवाले हैं । उनकी एकमात्र उम्मीद अब रायगढ़ विधायक ओ पी चौधरी हैं ।
रायगढ़ की ऐतिहासिक परंपरा पर लगेगा विराम? सालभर से हजारों लोगों को रहता है जन्माष्टमी मेले का बेसब्री से इंतजार! प्रशासन को अपने फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत?

