रायगढ़। रायगढ़ कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में तथा जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. के.वी. राव के कुशल नेतृत्व में आज जिले में ‘उल्लासम साक्षरता परीक्षा अभियान’ का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति जागरूकता, आत्मसम्मान और सामाजिक परिवर्तन का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया।
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) द्वारा संचालित इस अभियान के अंतर्गत जिले में 1015 परीक्षा केंद्रों की स्थापना की गई, जहां शाम 4 बजे तक 8526 परीक्षार्थियों ने उत्साह, उमंग और आत्मविश्वास के साथ भाग लेकर सब पढ़ें, सब बढ़ें” के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।इस परीक्षा का उद्देश्य बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान का मूल्यांकन कर प्रत्येक नागरिक को शिक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है। जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण, रायगढ़ द्वारा संचालित यह अभियान “नवभारत साक्षर भारत” के राष्ट्रीय संकल्प को सशक्त आधार प्रदान कर रहा है।
जेल की दीवारों के भीतर भी जगा शिक्षा का प्रकाश
इस अभियान का सबसे प्रेरणादायक दृश्य जिला जेल रायगढ़ में देखने को मिला, जहां साक्षरता की रोशनी ने बंदियों के जीवन में नई उम्मीद जगाई। डीपीओ डी.के. वर्मा द्वारा परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया गया, जहां 54 पुरुष एवं 12 महिला बंदियों ने पूरे उत्साह के साथ परीक्षा दी।
विशेष रूप से, 60 वर्ष से अधिक आयु के बंदियों की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि सीखने की कोई आयु सीमा नहीं होती।
63 वर्षीय बंदी रामप्रसाद सिद्धार्थ, जिन्होंने जेल में ही पढ़ना-लिखना सीखा और आज सुंदर व प्रभावशाली लेखन कर रहे हैं, इस अभियान की जीवंत मिसाल बन गए हैं यह दर्शाते हुए कि इच्छाशक्ति हो तो हर बंद दरवाजा ज्ञान से खुल सकता है।जिला जेल अधीक्षक जी.एस. शोरी के सतत प्रयासों और सकारात्मक पहल के चलते बंदियों को नियमित शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे उनके भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और समाज में पुनर्स्थापना की नई उम्मीद जागृत हो रही है।
एक जनआंदोलन की ओर बढ़ता कदम
‘उल्लासम साक्षरता परीक्षा’ ने रायगढ़ में शिक्षा को एक जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया है। यह अभियान न केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित है, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और सशक्त समाज के निर्माण की आधारशिला भी रख रहा है।

