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जवाफूल की खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ीं शिला पैकरा

3 एकड़ में की खेती, 30 क्विंटल उत्पादन से मिली अच्छी आमदनी

बाजार में जवाफूल चावल की बढ़ती मांग, 150 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा दाम

स्व-सहायता समूह और मशरूम उत्पादन से भी मजबूत कर रहीं आजीविका

रायगढ़, 12 मार्च 2026/ लैलूंगा विकासखंड के ग्राम करवाजोर की श्रीमती शिला पैकरा पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नवाचार अपनाते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में मिसाल पेश कर रही हैं। उन्होंने अपने लगभग 3 एकड़ खेत में जवाफूल धान की खेती कर न केवल बेहतर उत्पादन प्राप्त किया, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाया है।
शिला पैकरा ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने करीब 3 एकड़ क्षेत्र में जवाफूल धान की खेती की थी, जिससे लगभग 30 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में जवाफूल चावल की अच्छी मांग होने के कारण उन्हें इसका बेहतर मूल्य भी मिल रहा है। वर्तमान में स्थानीय बाजार में जवाफूल चावल की कीमत करीब 150 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है। जवाफूल धान अपनी विशेष सुगंध और स्वाद के लिए जाना जाता है, जिसके कारण इसकी बाजार में हमेशा अच्छी मांग रहती है। शिला पैकरा का कहना है कि यदि किसानों को उचित मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध हो, तो पारंपरिक धान की इस किस्म की खेती से अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।
कृषि के साथ-साथ शिला पैकरा आजीविका के अन्य माध्यमों से भी जुड़ी हुई हैं। वे गांव के गायत्री स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं और समूह के माध्यम से मशरूम उत्पादन का कार्य भी कर रही हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। शिला पैकरा की सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं। वे मानती हैं कि मेहनत, नवाचार और समूह की ताकत के सहारे ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। आज वे खेती और आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही

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