रायगढ़, / राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनव्हीएचसीपी) के अंतर्गत हिपेटाइटिस से संबंधित लक्षण, जांच एवं उपचार विषय पर एक दिवसीय बैठक सह प्रशिक्षण का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के आरोग्यम सभाकक्ष में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिपेटाइटिस संक्रमण की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करना रहा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए बताया कि हिपेटाइटिस एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है, बशर्ते समय पर जांच और उपचार किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से उच्च जोखिम समूहों के प्रति सतर्कता बरतने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिंगल शेयरिंग ब्लेड या रेजर का उपयोग, असुरक्षित तरीके से टैटू बनवाना, संक्रमित गर्भवती माता से शिशु में संक्रमण की संभावना तथा असुरक्षित यौन व्यवहार हिपेटाइटिस संक्रमण के प्रमुख कारण हैं। इनसे बचाव के लिए जागरूकता और नियमित जांच अत्यंत आवश्यक है।
सीएमएचओ ने निर्देशित किया कि सभी हाई-रिस्क समूहों एवं एएनसी (गर्भवती महिलाओं) की हिपेटाइटिस जांच अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए, ताकि संक्रमण की समय रहते पहचान कर उपचार प्रारंभ किया जा सके और आगे प्रसार रोका जा सके। कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हिपेटाइटिस की रोकथाम, स्क्रीनिंग, रिपोर्टिंग एवं उपचार संबंधी दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई, जिससे जिले में वायरल हिपेटाइटिस उन्मूलन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
प्रशिक्षण कार्यशाला में जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुमित शैलेन्द्र मंडल, डॉ. केनन डेनियल, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रंजना पैंकरा, डॉ. कल्याणी पटेल, आईडीएसपी कार्यक्रम के जिला डाटा प्रबंधक श्री रामकुमार जांगड़े, सुश्री जानकी देवांगन, माइक्रोबायोलॉजिस्ट सुश्री ज्योति खरे सहित जिले के चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ एवं विकासखंड डाटा प्रबंधकों की उपस्थिति रही।

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