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VB-G RAM G जनजागरण अभियान में सक्रिय हुई युवा मोर्चा

VB-G RAM G योजना की संपूर्ण जानकारी के लिए प्रशांत सिंह और शशांक पाण्डे ने पुसौर में चलाया जनजागरण अभियान

रायगढ़। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष अरुणधर दीवान के निर्देशानुसार एवं युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष सुमित शर्मा के सहयोग से भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला मंत्री प्रशांत सिंह एवं युवा मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य शशांक पाण्डे के द्वारा VB- G RAM G विकसित भारत गारंटी फ़ॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के संबंध में किसान नेता घनश्याम पटेल,युवा मोर्चा मंडल महामंत्री अविनाश गुप्ता,विवेक गुप्ता एवं कोड़पाली सरपंच विनोद पंडा के साथ योजना की विस्तृत जानकारी एवं विपक्ष के द्वारा फैलाए भ्रामक जानकारी योजना बंद होने के बातों से हितग्राहियों को अवगत करवाते हुए बताया गया कि हर गरीब को रोजगार मिले और उसकी गरिमा का सम्मान हो। गरीब, जनजाति और पिछड़ा को रोजगार मिले, उसके लिए यह क़ानून आया है। ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करना है। यह पूरा बिल महात्मा गांधी जी की भावना के अनुरूप है और राम राज्य की स्थापना के लिए लाया जा रहा है।

साथ ही प्रशांत सिंह से पूछा की आखिर कांग्रेस और इंडी गठबंधन को विकसित भारत और भगवान् राम के नाम से इतनी नफरत क्यों है? कांग्रेस कितनी भी साजिश रच ले, देश 2047 तक ‘विकसित भारत’ बन कर रहेगा। नई योजना में काम के दिन ज्यादा होंगे तो साथ ही मजदूरों को पारिश्रमिक भी जल्दी मिलेगा। हर ग्रामीण परिवार को हर साल 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगी। वन क्षेत्र में काम करने वाले ST कामगारों को 25 दिन का रोजगार और अधिक मिलेगा।

मनरेगा पर सबसे अधिक खर्च मोदी सरकार ने किया है। मनरेगा पर अब तक 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए जिसमें मोदी सरकार ने 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। रोजगार योजना का नाम पहले से महात्मा गाँधी जी के नाम पर नहीं था। 1980 में इंदिरा गांधी ने सभी पुरानी रोजगार योजनाओं को मिला कर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम योजना का नाम दिया जिसे राजीव गाँधी ने जवाहर रोजगार योजना का नाम दे दिया।

सोनिया-मनमोहन की सरकार ने 2004 में इसे NREGA कर दिया गया जिसे फिर 2005 में MNREGA किया गया। कांग्रेस की सरकार ने जब जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान नहीं था? इसी तरह, आवास योजना का नाम पहले ग्रामीण आवास योजना था, राजीव गांधी ने 1985 में इसका नाम बदल कर इंदिरा आवास योजना कर दिया था। अप्रैल 2005 में कांग्रेस सरकार ने ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना कर दिया। हर योजना में इन्होंने गाँधी (एक परिवार) -नेहरू के नाम जबरन डाले। मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है। 2005 में मनरेगा शुरू हुई लेकिन अब ग्रामीण भारत बदल गया है।

सन 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 25.7% से घटकर 2023-24 में 4.86% रह गई। साथ ही, कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है और आजीविका में विविधता आई है। पुराना ओपन-एंडेड मॉडल अब आज की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से मेल नहीं खाता। 2005 में हमारी ज़रूरतें अलग थीं, अब हमारी ज़रूरतें अलग हैं इसलिए इस ग्रामीण रोजगार योजना को 2025 की आवश्यकताओं के साथ पुनः व्यवस्थित करना आवश्यक था।

कांग्रेस की सरकार में मनरेगा में कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं थी, अब इसमें रियल टाइम डेटा अपलोड होगा। GPS और मोबाइल मॉनिटरिंग होगी और AI के द्वारा फ्रॉड डिटेक्शन होगा। इससे सही लाभार्थियों को काम मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।

नए क़ानून का फोकस 4 प्राथमिकताओं पर है 1. जल संबंधी कार्य, 2. कोर-ग्रामीण बुनियादी ढांचा का निर्माण, 3. आजीविका संबंधी बुनियादी ढाँचा का निर्माण और 4. खराब मौसम के कारण काम में कमी को कम करना है। जल सुरक्षा से खेती को बढ़ावा मिलेगा, सड़कें और कनेक्टिविटी से बाज़ार में सुधार होगा, भंडारण और आजीविका संपत्तियां ग्रामीण आय में वृद्धि लाएगी और जलवायु अनुकूल कार्य गांवों को सशक्त बनायेंगे।

VB-G RAM G बिल में प्रावधान किया गया है कि बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिन काम बंद कर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बुआई और कटाई के समय मजदूरों की कमी नहीं होने देना है। मनरेगा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
नए बिल में मनरेगा के उलट हर हफ्ते पेमेंट किया जा सकता है। मनरेगा में 15 दिन में मजदूरी का भुगतान होता था।

कांग्रेस की सरकारों में नामकरण

कांग्रेस सरकारों देश के लगभग 600 संस्थानों, योजनाओं, पुरस्कारों के नाम गाँधी परिवार के नाम पर रखे। देश के खेल रत्न अवार्ड को भी राजीव गाँधी के नाम पर रखा गया जबकि खेल में राजीव गाँधी जी का कोई योगदान नहीं था। कांग्रेस पार्टी नेहरू-गांधी खानदान के सदस्यों के जन्मतिथि को राष्ट्रीय पर्व बना दिया और पुण्यतिथि को राष्ट्रीय शोक का दिन। कांग्रेस की सरकारों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी, सरदार वल्लभ भाई पटेल जी, लाल बहादुर शास्त्री जी जैसे कई नेताओं के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव किया गया

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